इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
लालबहादुर शास्त्री के योगदान के साथ, यह ‘कल्याण’ पत्रिका का पहला ‘धर्मांक’ विशेषांक हो सकता है। ‘कल्याण’ के विशेषांक (अंक) किसी एक विशेष विषय पर केंद्रित होते हैं। ‘धर्मांक’ का अर्थ है कि यह अंक ‘धर्म’ की अवधारणा पर केंद्रित है। इसमें धर्म क्या है, उसके विभिन्न स्वरूप, मानव जीवन में उसका महत्व और धर्म-पालन के मार्ग जैसे विषयों पर विभिन्न विद्वानों, संतों और विचारकों के लेख शामिल हो सकते हैं। लालबहादुर शास्त्री जैसे व्यक्तित्व का इसमें शामिल होना इसकी गंभीरता और महत्व को और बढ़ा देता है।
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