इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन धर्म के महापर्व ‘पर्युषण’ के दौरान मनाए जाने वाले ‘दशलक्षण धर्म’ पर केंद्रित है। इसमें उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य, और ब्रह्मचर्य इन दस धर्मों के स्वरूप और महत्व की विस्तृत विवेचना की गई है। यह कृति बताती है कि कैसे इन दस गुणों को अपने जीवन में धारण करने से आत्मा का शुद्धिकरण होता है और वह मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होती है।
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