इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
विजय-प्रशस्ति-सार’ का अर्थ है ‘विजय की प्रशंसा का सार’। यह एक काव्य-कृति है जिसमें किसी राजा, आचार्य या किसी सिद्धांत की ‘विजय’ की ‘प्रशस्ति’ या प्रशंसा की गई है। विजयधर्म सूरि से जुड़ा होने के कारण, यह संभवतः उनके जीवन की किसी महत्वपूर्ण उपलब्धि या उनके द्वारा किसी शास्त्रार्थ में प्राप्त विजय का काव्यात्मक वर्णन है। यह उस व्यक्ति या घटना की कीर्ति और महत्व को स्थापित करने का एक साहित्यिक प्रयास है।
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