इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘श्री प्रतिक्रमण सूत्र’ जैन धर्म के एक अत्यंत महत्वपूर्ण दैनिक अनुष्ठान ‘प्रतिक्रमण’ में उपयोग होने वाले सूत्रों और पाठों का एक संग्रह है। ‘प्रतिक्रमण’ का अर्थ है ‘पीछे लौटना’, अर्थात दिन भर में जाने-अनजाने में हुए पापों और गलतियों का पश्चाताप करना और आत्मा की शुद्धि के लिए प्रार्थना करना। यह पुस्तक साधकों को इस आवश्यक आत्म-निरीक्षण की क्रिया को सही विधि से संपन्न करने में मदद करती है।
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