इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
कौण्ड भट्ट द्वारा रचित ‘बृहत् वैयाकरणभूषणं’ संस्कृत व्याकरण के दर्शन पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गहन ग्रंथ है। यह प्रसिद्ध वैयाकरण भर्तृहरि के ‘वाक्यपदीय’ के सिद्धांतों पर आधारित है और शब्द-अर्थ के संबंध, स्फोटवाद और वाक्य के अर्थ-निर्णय जैसे जटिल विषयों का तार्किक विश्लेषण करता है। यह ग्रंथ केवल व्याकरण के नियम नहीं बताता, बल्कि भाषा के पीछे के दार्शनिक सिद्धांतों की मीमांसा करता है। यह संस्कृत व्याकरण और भारतीय दर्शन के उच्चतर अध्ययन के लिए एक अनिवार्य कृति मानी जाती है, जिसका अध्ययन विद्वानों द्वारा किया जाता है।
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