इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
श्री जयदेव द्वारा रचित ‘गीतगोविन्दकाव्यम्’ संस्कृत साहित्य का एक अनुपम और मधुर काव्य-रत्न है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम, विरह और पुनर्मिलन की लीलाओं का अत्यंत काव्यात्मक और संगीतात्मक वर्णन है। यह काव्य अपनी कोमलकांत पदावली, भक्ति-रस और श्रृंगार-रस के अद्भुत समन्वय के लिए प्रसिद्ध है। भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य परंपराओं पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। यह छठा संस्करण इस अमर कृति का एक परिष्कृत पाठ प्रस्तुत करता है, जो पाठकों को भक्ति और काव्य के दिव्य आनंद में डुबो देता है।
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