इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
मुनि मानसागर द्वारा रचित यह पुस्तक ‘अक्षय तृतीया’ पर्व की महिमा और महत्व का वर्णन करती है। जैन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के प्रथम आहार (इक्षु-रस) से जुड़ा है, जिसे राजा श्रेयांस ने दिया था। यह दिन ‘आहार चर्या’ की शुरुआत का प्रतीक है। इस ग्रंथ में इस ऐतिहासिक घटना का विस्तार से वर्णन, इस दिन किए जाने वाले उपवास और दान का पुण्य-फल, और इस पर्व के पीछे छिपे आध्यात्मिक संदेश को समझाया गया है। यह जैन श्रद्धालुओं के लिए इस पवित्र दिन के महत्व को समझने हेतु एक भक्तिपूर्ण कृति है।
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