इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
आचार्य कुंथुसागरजी महाराज द्वारा रचित ‘मुनि धर्मप्रदीप’ जैन मुनियों के धर्म और आचरण पर प्रकाश डालने वाली एक कृति है। ‘प्रदीप’ यानी दीपक, यह पुस्तक मुनि-धर्म के मार्ग को आलोकित करने का कार्य करती है। इसमें दिगंबर साधुओं द्वारा पालन किए जाने वाले महाव्रतों, समितियों, गुप्तियों और अन्य कठोर नियमों का सरल और स्पष्ट भाषा में विवेचन किया गया है। यह ग्रंथ न केवल साधुओं के लिए, बल्कि गृहस्थों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो यह जानना चाहते हैं कि आत्म-कल्याण के लिए एक संत का जीवन कितना त्यागमय और अनुशासित होता है।
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