इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
महाकवि भवभूति द्वारा रचित ‘उत्तररामचरितम्’ संस्कृत साहित्य के सर्वश्रेष्ठ नाटकों में से एक है। यह रामायण के उत्तरार्ध की कथा पर आधारित है, जिसमें सीता-परित्याग के बाद राम के दुःख और अंत में उनके पुनर्मिलन का मार्मिक वर्णन है। यह नाटक अपने करुण रस और गहन मानवीय संवेदनाओं के लिए प्रसिद्ध है। भवभूति ने राम के चरित्र को एक आदर्श राजा के साथ-साथ एक दुखी पति के रूप में भी चित्रित किया है। “एको रसः करुण एव” की उद्घोषणा करने वाला यह नाटक कालिदास के नाटकों के समकक्ष माना जाता है।
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