इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
महादुखित विधवा’ के छद्म नाम से लिखी गई यह पुस्तक उन्नीसवीं सदी के सामाजिक सुधार आंदोलन के दौर की एक महत्वपूर्ण कृति प्रतीत होती है। इसका शीर्षक उस समय की विधवाओं की दयनीय स्थिति, उनके दुखों और सामाजिक कुरीतियों पर एक मार्मिक विलाप की ओर संकेत करता है। ‘गड़बड़ स्मृति’ और ‘बुढ़िया पुराण’ जैसे शब्द तत्कालीन समाज में प्रचलित अंधविश्वासों और पुरानी रूढ़ियों पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष हो सकते हैं। यह पुस्तक उस युग में महिलाओं, विशेषकर विधवाओं के शोषण और उनकी पीड़ा को उजागर करने वाला एक साहसिक सामाजिक दस्तावेज़ हो सकती है।
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