इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
किरातार्जुनीयम्’ महाकवि भारवि द्वारा छठी शताब्दी में रचित एक उत्कृष्ट संस्कृत महाकाव्य है। यह संस्कृत के पाँच महाकाव्यों में से एक है। इसकी कथा महाभारत के वन पर्व से ली गई है, जिसमें अर्जुन भगवान शिव से पाशुपतास्त्र प्राप्त करने के लिए तपस्या करते हैं और किरात (शिकारी) वेशधारी शिव के साथ उनका युद्ध होता है। यह महाकाव्य अपनी अर्थ-गौरव (कम शब्दों में गहरा अर्थ), जटिल काव्य शैली, और राजनीतिक तथा नैतिक सिद्धांतों के सुंदर चित्रण के लिए प्रसिद्ध है। यह संस्कृत साहित्य की एक शिखर कृति मानी जाती है।
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