इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती के दृष्टिकोण और आदर्शों का विश्लेषण करती है। लेखक इस कृति में यह पड़ताल करता है कि दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना किन उद्देश्यों और सपनों के साथ की थी, और वर्तमान में यह संगठन उन आदर्शों पर कितना खरा उतर रहा है। इसमें दयानंद के वैदिक दर्शन, सामाजिक सुधारों (जैसे जाति-प्रथा का विरोध, महिला शिक्षा), और राष्ट्रीय चेतना के संदेश का विवेचन होगा। यह आर्य समाज के इतिहास और उसकी वर्तमान स्थिति पर एक आलोचनात्मक और चिंतनशील दृष्टि प्रदान करती है।
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