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वाक्यपदीयम् प्रथम काण्डम् - Vakyapadiyam Part-1 - Book
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वाक्यपदीयम् प्रथम काण्डम् – Vakyapadiyam Part-1 – Book

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पुस्तक सार

वाक्यपदीयम्’ पाँचवीं शताब्दी के महान भाषा-दार्शनिक भर्तृहरि द्वारा रचित एक मौलिक ग्रंथ है। यह संस्कृत व्याकरण और भाषा-दर्शन का एक आधार स्तंभ है। यह ग्रंथ तीन कांडों (भागों) में विभाजित है। यह प्रथम कांड, जिसे ‘ब्रह्म कांड’ या ‘आगम कांड’ भी कहा जाता है, ‘स्फोट’ के सिद्धांत को स्थापित करता है। भर्तृहरि के अनुसार, स्फोट भाषा की अविभाज्य इकाई है जो अर्थ को प्रकट करती है, और यह परम वास्तविकता ‘शब्द-ब्रह्म’ का ही एक रूप है। यह भाषा के अंतिम दार्शनिक आधार की पड़ताल करता है।

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