इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक अकादमिक और आलोचनात्मक ग्रंथ है जो संस्कृत काव्यशास्त्र के दो प्रमुख आचार्यों – राजशेखर और क्षेमेन्द्र – के काव्य-सिद्धांतों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। राजशेखर, जो अपनी “काव्यमीमांसा” के लिए जाने जाते हैं, ने कवि-शिक्षा और काव्य-रचना की प्रक्रिया पर विस्तार से लिखा। वहीं, क्षेमेन्द्र अपने “औचित्यविचारचर्चा” ग्रंथ के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसमें उन्होंने ‘औचित्य’ (appropriateness) को काव्य का प्राण तत्व माना। यह पुस्तक इन दोनों आचार्यों के सिद्धांतों, जैसे- रस, अलंकार, रीति, और औचित्य, की समानताओं और भिन्नताओं का गहन विश्लेषण करती है। यह संस्कृत साहित्य और काव्यशास्त्र के छात्रों तथा शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण तुलनात्मक अध्ययन है।
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