इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
कुण्डलिनी-जागरण’ योग और तंत्र की एक गहन साधना पद्धति पर आधारित एक पुस्तक है। इसमें कुंडलिनी शक्ति के रहस्य को समझाया गया है, जिसे भारतीय योग परंपरा में मूलाधार चक्र में सोई हुई एक सर्पिलाकार ऊर्जा माना जाता है। ग्रंथ में विभिन्न यौगिक क्रियाओं, जैसे कि आसन, प्राणायाम, बंध, मुद्रा और ध्यान के माध्यम से इस शक्ति को जागृत करने और इसे विभिन्न चक्रों से होते हुए सहस्रार चक्र तक ले जाने की प्रक्रिया का वर्णन है। कुंडलिनी के जागरण से साधक को अलौकिक सिद्धियाँ, गहरा आत्म-ज्ञान और अंततः समाधि या मोक्ष की अनुभूति होती है। यह पुस्तक इस रहस्यमयी और शक्तिशाली साधना मार्ग के लिए एक मार्गदर्शिका का कार्य करती है।
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