इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह ग्रंथ आचार्य पद्मनन्दि द्वारा रचित ‘पंचविंशति’ नामक कृतियों का संग्रह है। ‘पंचविंशति’ का अर्थ है ‘पच्चीस’, और इसमें विभिन्न विषयों पर 25 श्लोकों या पदों के छोटे-छोटे स्तोत्र या प्रकरण शामिल होते हैं। आचार्य पद्मनन्दि जैन परंपरा के एक प्रमुख विद्वान थे, और उनकी ये रचनाएँ जैन दर्शन, नैतिकता और आध्यात्मिकता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती हैं। इसमें आत्म-स्वरूप का चिंतन, वैराग्य की भावना, कर्म के सिद्धांत और मोक्ष मार्ग का उपदेश हो सकता है। यह कृति अपनी संक्षिप्तता और सारगर्भित शैली के लिए जानी जाती है, जो जैन सिद्धांतों के गहरे ज्ञान को कम शब्दों में व्यक्त करती है।
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