इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक हरियाणा प्रदेश के समृद्ध और जीवंत लोकसाहित्य का एक व्यापक संकलन और अध्ययन है। इसमें हरियाणा की लोक-परंपरा में प्रचलित विभिन्न विधाओं को शामिल किया गया है, जैसे कि लोकगीत (सांग, रागनियां), लोक-कथाएं, लोक-नाट्य (स्वांग), और कहावतें-मुहावरे। यह ग्रंथ इन लोक-रचनाओं के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों की भी व्याख्या करता है। यह बताता है कि कैसे यह साहित्य हरियाणा के लोगों के जीवन, उनके हर्ष-विषाद, रीति-रिवाजों और मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है। यह हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे एक व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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