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गैर्वाणी 15 मई 1974 - Gairvaani 15 MAY 1974 - Book
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गैर्वाणी 15 मई 1974 – Gairvaani 15 MAY 1974 – Book

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पुस्तक सार

“गैर्वाणी” संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को समर्पित एक प्रतिष्ठित पत्रिका थी। 15 मई 1974 का यह अंक संस्कृत साहित्य, व्याकरण, दर्शन और समकालीन विषयों पर लिखे गए लेखों का एक संग्रह प्रस्तुत करता है। इस अंक में विद्वानों द्वारा रचित मौलिक संस्कृत कविताएँ, कहानियाँ और निबंध शामिल हो सकते हैं, जो इस ‘देववाणी’ की जीवंतता को दर्शाते हैं। पत्रिका का उद्देश्य संस्कृत को केवल एक प्राचीन भाषा के रूप में नहीं, बल्कि एक आधुनिक और जीवंत संवाद के माध्यम के रूप में प्रस्तुत करना था। यह अंक संस्कृत प्रेमियों और अध्येताओं के लिए उस समय की साहित्यिक और अकादमिक गतिविधियों की एक झलक प्रदान करता है।

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