इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“जैनकुमार संभव महाकाव्यम्” एक संस्कृत महाकाव्य है जो महाकवि कालिदास के प्रसिद्ध ग्रंथ “कुमारसंभव” की शैली और संरचना से प्रेरित होकर जैन परंपरा के संदर्भ में लिखा गया है। जहाँ कालिदास का काव्य शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय के जन्म का वर्णन करता है, वहीं यह जैन महाकाव्य किसी तीर्थंकर या शलाकापुरुष के जन्म और उनके जीवन की घटनाओं पर केंद्रित हो सकता है। इसमें जैन दर्शन के सिद्धांतों, जैसे कर्म, तप और अहिंसा, को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह कृति संस्कृत काव्य परंपरा और जैन धार्मिक साहित्य के सुंदर समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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