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संस्कृत काव्यशास्त्र की अर्वाचीन परंपरा - Sanskrit Kavya Shastra Ki Arvachin Parampara - Book
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संस्कृत काव्यशास्त्र की अर्वाचीन परंपरा – Sanskrit Kavya Shastra Ki Arvachin Parampara – Book

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414 Pages
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115 MB
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पुस्तक सार

यह एक अकादमिक और आलोचनात्मक ग्रंथ है जो संस्कृत काव्यशास्त्र (Poetics) की आधुनिक या अर्वाचीन परंपरा का विश्लेषण करता है। जहाँ अधिकांश अध्ययन प्राचीन आचार्यों जैसे भरत, मम्मट और विश्वनाथ पर केंद्रित होते हैं, वहीं यह पुस्तक 17वीं-18वीं शताब्दी के बाद के काव्यशास्त्रियों और उनके योगदान पर प्रकाश डालती है। इसमें पंडितराज जगन्नाथ जैसे परवर्ती आचार्यों के सिद्धांतों और उनके द्वारा प्रस्तुत की गई नई अवधारणाओं की विस्तृत विवेचना की गई है। यह कृति दर्शाती है कि संस्कृत काव्यशास्त्र की परंपरा प्राचीन काल में ही समाप्त नहीं हुई, बल्कि आधुनिक युग तक जीवंत और विकासशील बनी रही।

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