इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक गायत्री मंत्र के गहरे रहस्यों और उसकी साधना पद्धतियों पर एक विस्तृत ग्रंथ है। इसमें गायत्री मंत्र के प्रत्येक शब्द के दार्शनिक और आध्यात्मिक अर्थ की गहराई से व्याख्या की गई है। ‘गायत्री पंचांग’ का उल्लेख यह दर्शाता है कि इसमें मंत्र जाप से संबंधित पांच प्रमुख अंगों – पटल, पद्धति, कवच, स्तोत्र और सहस्रनाम – का भी समावेश हो सकता है, जो साधना को पूर्णता प्रदान करते हैं। पुस्तक में मंत्र के सही उच्चारण, उसके विभिन्न अनुष्ठानों, और उससे प्राप्त होने वाले शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों पर प्रकाश डाला गया है। यह साधकों के लिए गायत्री उपासना के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पक्ष को समझने हेतु एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका है।
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