इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत ‘पौषध व्रत’ की विधि और महत्व पर केंद्रित एक मार्गदर्शिका है। पौषध व्रत एक ऐसी साधना है जिसमें श्रावक (गृहस्थ) एक निश्चित समय, आमतौर पर 24 घंटे, के लिए साधु-साध्वियों जैसा संयमित और त्यागमय जीवन व्यतीत करते हैं। इस पुस्तक में व्रत को ग्रहण करने की प्रक्रिया, उसके दौरान पालन किए जाने वाले नियमों (जैसे-अहिंसा, सत्य, अस्तेय), सामायिक (समता का अभ्यास), स्वाध्याय और ध्यान की विधियों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसका उद्देश्य व्रतियों को सही तरीके से इस अनुष्ठान को संपन्न करने में मदद करना है, ताकि वे आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का लाभ प्राप्त कर सकें।
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