इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“अरुणाचल पञ्चरत्नम्” भगवान शिव के अरुणाचल (तिरुवन्नामलाई) स्वरूप की स्तुति में श्री रमण महर्षि द्वारा रचे गए पाँच श्लोकों का एक संग्रह है। यह पुस्तक, “दर्पणम” (दर्पण), उन गहन श्लोकों पर एक टीका या भाष्य हो सकती है। इसका उद्देश्य अद्वैत वेदांत के सार से परिपूर्ण इन श्लोकों के गूढ़ अर्थ को प्रतिबिंबित करना और स्पष्ट करना है। टीका में प्रत्येक श्लोक के शब्दों की दार्शनिक व्याख्या, आत्मा और ब्रह्म की एकता, और आत्म-विचार के मार्ग को समझाया गया होगा। यह रमण महर्षि के अनुयायियों और अद्वैत वेदांत के साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है, जो उन्हें महर्षि की शिक्षाओं के मर्म तक ले जाती है।
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