इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक शोध ग्रंथ है जो भारतीय काव्यशास्त्र (poetics) का अध्ययन ‘आगम’ (विशेषकर शैव और वैष्णव तंत्र) के दृष्टिकोण से करता है। पारंपरिक रूप से, काव्यशास्त्र का अध्ययन अलंकार, रस और ध्वनि के सिद्धांतों के माध्यम से किया जाता है। यह कृति एक नया दृष्टिकोण अपनाती है, यह तर्क देते हुए कि आगमों में वर्णित ब्रह्मांड विज्ञान, चेतना के स्तर, और मंत्र-विज्ञान के सिद्धांतों ने भारतीय काव्य-चिंतन, विशेष रूप से ‘रस’ और ‘ध्वनि’ की अवधारणाओं को गहराई से प्रभावित किया है। यह काव्यशास्त्र और तंत्र-दर्शन के बीच के गहरे संबंधों को उजागर करने का एक अनूठा प्रयास है।
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