इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
आलोचनादर्श’ साहित्यिक आलोचना के सिद्धांतों और विधियों पर एक ग्रंथ है। ‘आदर्श’ शब्द का अर्थ है ‘दर्पण’ या ‘मानक’, जो यह दर्शाता है कि यह कृति साहित्यिक कृतियों का मूल्यांकन करने के लिए एक मानक ढाँचा या एक प्रतिबिंब प्रस्तुत करती है। इसमें संभवतः पाश्चात्य और भारतीय काव्यशास्त्र के विभिन्न आलोचनात्मक दृष्टिकोणों, जैसे रस-सिद्धांत, ध्वनि-सिद्धांत, संरचनावाद, या मार्क्सवादी आलोचना, का परिचय और विश्लेषण किया गया होगा। इसका उद्देश्य छात्रों और आलोचकों को साहित्य की गहरी समझ विकसित करने और उसका तर्कपूर्ण मूल्यांकन करने के लिए उपकरण प्रदान करना है।
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