इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक अकादमिक और भाषा-वैज्ञानिक शोध-ग्रंथ है, जो आधुनिक हिंदी कविता की भाषा की ‘संरचना’ का अध्ययन करता है। इसमें छायावाद से लेकर आज तक की कविता में आए भाषिक परिवर्तनों, जैसे- नए शब्दों का प्रयोग, वाक्य-विन्यास में बदलाव, और नए बिम्बों तथा प्रतीकों के विकास का विश्लेषण किया गया है। यह कृति हिंदी भाषा और साहित्य के शोधकर्ताओं तथा उन गंभीर पाठकों के लिए है जो कविता के शिल्प और उसकी भाषिक बनावट को गहराई से समझना चाहते हैं।
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