इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
समयसुंदर द्वारा रचित ‘अनेकार्थ रत्न मञ्जूषायां’ संस्कृत या प्राकृत का एक कोशग्रंथ है, जो ‘अनेकार्थ’ यानी एक ही शब्द के अनेक अर्थों पर केंद्रित है। ‘रत्न मंजूषा’ का अर्थ है रत्नों की पिटारी, जो यह दर्शाता है कि यह शब्दों के विविध अर्थ रूपी रत्नों का खजाना है। इस प्रकार के कोश काव्य रचना और शास्त्रों को समझने में अत्यंत सहायक होते हैं, क्योंकि वे कवियों को श्लेष अलंकार का प्रयोग करने और टीकाकारों को सही अर्थ निकालने में मदद करते हैं। यह भारतीय कोश-परंपरा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।