इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
अनुरागलतिका’ एक काव्य रचना है जो ‘अनुराग’ या प्रेम की भावना पर केंद्रित है। ‘लतिका’ का अर्थ है बेल, जो प्रेम के कोमल, सुंदर और फैलने वाले स्वभाव का प्रतीक है। यह कृति संभवतः भक्ति साहित्य से संबंधित है, जिसमें राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम (शृंगार भक्ति) का वर्णन हो सकता है, या यह रीतिकालीन काव्य परंपरा का हिस्सा भी हो सकती है, जिसमें नायक-नायिका के लौकिक प्रेम का चित्रण किया गया हो। ‘भाषा’ शब्द यह संकेत देता है कि यह संस्कृत के बजाय किसी स्थानीय भाषा जैसे ब्रजभाषा में रची गई है। यह प्रेम की विभिन्न अवस्थाओं और भावनाओं का एक सुंदर और काव्यात्मक चित्रण प्रस्तुत करती है।
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