इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
आर्य मंतव्य प्रकाश’ आर्य समाज के सिद्धांतों और मान्यताओं पर प्रकाश डालने वाला एक ग्रंथ है। यह पुस्तक महर्षि दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं और वैदिक दर्शन पर आधारित है। इसका दूसरा भाग संभवतः आर्य समाज के विशिष्ट मंतव्यों, जैसे कि ईश्वर का स्वरूप, वेदों की प्रामाणिकता, मूर्तिपूजा का खंडन, सामाजिक सुधार (जैसे बाल विवाह और जातिवाद का विरोध), और कर्म-पुनर्जन्म के सिद्धांत पर विस्तार से चर्चा करता है। इस ग्रंथ का उद्देश्य पाठकों के मन में वैदिक धर्म के बारे में फैले भ्रम और अंधविश्वासों को दूर करना और एक तर्कसंगत, वैज्ञानिक और सामाजिक रूप से प्रगतिशील दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है।
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