इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
आर्यमञ्जुश्रीमूलकल्प’ बौद्ध धर्म के वज्रयान (तांत्रिक) संप्रदाय का एक महत्वपूर्ण और विशाल ग्रंथ है। यह बोधिसत्व मंजुश्री को समर्पित है और इसमें विभिन्न प्रकार के मंत्रों, मंडलों, अनुष्ठानों और साधनाओं का विस्तृत वर्णन है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि इसमें ज्योतिष, चिकित्सा और भारतीय इतिहास, विशेषकर मौर्य काल से लेकर हर्ष काल तक के राजाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी मिलती है। इस ग्रंथ का उद्देश्य साधक को विभिन्न सिद्धियाँ प्राप्त करने और अंततः बोधि (ज्ञान) की अवस्था तक पहुँचने का मार्ग दिखाना है। यह तांत्रिक बौद्ध धर्म के विकास और उस समय के भारतीय समाज को समझने के लिए एक अमूल्य स्रोत है।
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