इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह दिगंबर जैन परंपरा के महान आचार्य कुन्दकुन्द द्वारा रचित ‘अष्टपाहुड’ (आठ पाहुड) नामक ग्रंथ पर एक ‘भाषा वचनिका’ अर्थात गद्य में लिखी गई विस्तृत व्याख्या है। ‘अष्टपाहुड’ में दर्शन, चारित्र, और मोक्ष मार्ग पर आठ छोटे-छोटे ग्रंथ शामिल हैं। पंडित जयचन्द छाबड़ा द्वारा रचित यह वचनिका प्राकृत गाथाओं के गूढ़ और दार्शनिक अर्थ को सरल हिंदी गद्य में समझाती है, जिससे आम स्वाध्यायी भी आचार्य कुन्दकुन्द की मूल शिक्षाओं को समझ सकें।
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