इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक द्विभाषी शब्दकोश है जो भारत की दो प्रमुख साहित्यिक भाषाओं, बंगला और हिंदी, के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करता है। यह बंगला शब्दों के हिंदी अर्थ और हिंदी शब्दों के बंगला समकक्ष प्रदान करता है। दोनों भाषाओं की जड़ें संस्कृत में होने के कारण, उनमें कई समानताएं हैं, लेकिन लिपि और कुछ शब्दावली में अंतर भी हैं। यह कोश उन लोगों के लिए अमूल्य है जो रवींद्रनाथ टैगोर, शरतचंद्र या अन्य बंगाली लेखकों को हिंदी में पढ़ना या समझना चाहते हैं, या जो दोनों भाषाओं और संस्कृतियों के बीच के गहरे संबंधों का अध्ययन कर रहे हैं।
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