इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“भल्लटशतकम्” कश्मीरी महाकवि भल्लट द्वारा 9वीं शताब्दी में रचित संस्कृत मुक्तक काव्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह लगभग सौ (शतक) श्लोकों का एक संग्रह है। इस कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके प्रत्येक श्लोक में अन्योक्ति (allegory) या अप्रस्तुत प्रशंसा अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है। इसमें कवि सीधे-सीधे अपनी बात न कहकर, किसी अन्य प्रतीक (जैसे- सिंह, हंस, कमल) के माध्यम से नैतिक, सामाजिक और व्यावहारिक जीवन के सत्यों पर मार्मिक टिप्पणी करता है। यह काव्य अपनी संक्षिप्तता, सारगर्भिता और व्यंग्यात्मक शैली के लिए प्रसिद्ध है, जो पाठकों को मनोरंजन के साथ-साथ गहन चिंतन के लिए भी प्रेरित करता है।
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