इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह प्रसिद्ध नाटककार द्विजेन्द्रलाल राय द्वारा रचित एक ऐतिहासिक-पौराणिक नाटक है, जो महाभारत के महान और悲剧적 (दुखद) पात्र ‘भीष्म’ पर केंद्रित है। यह नाटक भीष्म के चरित्र की जटिलताओं – उनकी अटूट प्रतिज्ञा, उनका त्याग, उनका कर्तव्य-परायणता और उनके आंतरिक संघर्ष – का एक शक्तिशाली और मार्मिक चित्रण करता है। यह दिखाता है कि कैसे एक महान व्यक्ति भी परिस्थितियों और अपने ही वचनों का दास बन सकता है।
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