इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
भ्रमरगीत’ महाकवि सूरदास के ‘सूरसागर’ का सबसे मार्मिक और काव्यात्मक प्रसंग है। यह पुस्तक इसी प्रसंग पर केंद्रित है। इसमें उस कथा का वर्णन है जहाँ श्रीकृष्ण उद्धव को गोपियों को समझाने के लिए ब्रज भेजते हैं। गोपियाँ उद्धव के निर्गुण ज्ञान के उपदेश को अस्वीकार कर देती हैं और एक भौंरे (भ्रमर) के माध्यम से उन पर और कृष्ण पर व्यंग्य करती हैं। यह सगुण भक्ति की निर्गुण ज्ञान पर विजय का एक अनुपम काव्य है, जो विरह और प्रेम की तीव्रता को दर्शाता है।
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