इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह संस्कृत व्याकरण के छात्रों और विद्वानों के लिए एक अत्यंत उपयोगी संदर्भ-ग्रंथ का प्रथम भाग है। ‘बृहद्’ का अर्थ है ‘विशाल’। इस संग्रह में संस्कृत के दो मूलभूत अंगों – ‘धातु-रूप’ (क्रिया के रूप, जैसे- पठति, पठतः, पठन्ति) और ‘शब्द-रूप’ (संज्ञा और सर्वनाम के रूप, जैसे- रामः, रामौ, रामाः) – को व्यवस्थित रूप से सूचीबद्ध किया गया है। यह छात्रों को विभिन्न धातुओं और शब्दों के सभी कालों, वचनों और विभक्तियों में सही रूप बनाने और पहचानने में मदद करता है। यह संस्कृत भाषा पर अधिकार प्राप्त करने के लिए एक अनिवार्य और व्यावहारिक उपकरण है।
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