इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
छन्दःशास्त्रम्’ काव्य के एक महत्वपूर्ण अंग ‘छंद’ का अध्ययन करने वाला शास्त्र है। यह ग्रंथ पिंगल द्वारा रचित ‘छंद सूत्र’ की परंपरा का हिस्सा हो सकता है। इसमें विभिन्न प्रकार के वैदिक और लौकिक छंदों (जैसे अनुष्टुप्, गायत्री, त्रिष्टुप्, इंद्रवज्रा) की संरचना, उनके लक्षण (गण, मात्रा, यति) और नियमों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। छंद शास्त्र यह सिखाता है कि कैसे अक्षरों और मात्राओं को एक व्यवस्थित लय में बांधकर कविता में संगीत और प्रवाह उत्पन्न किया जा सकता है। यह संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं के काव्य को गहराई से समझने और उसकी सराहना करने के लिए एक मौलिक ग्रंथ है।
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