इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह आचार्य धनञ्जय द्वारा रचित संस्कृत नाट्यशास्त्र का एक प्रसिद्ध और प्रामाणिक ग्रंथ है। ‘दशरूपकम्’ का अर्थ है ‘दस प्रकार के रूपक (नाटक)’। इसमें भरतमुनि के नाट्यशास्त्र के आधार पर नाटकों के दस प्रमुख प्रकारों का विस्तृत और व्यवस्थित विवेचन किया गया है। यह नाटक की कथावस्तु, नायक-नायिका भेद, और रस-सिद्धांत जैसे विषयों पर प्रकाश डालता है। यह संस्कृत नाटक और साहित्य के छात्रों के लिए एक अनिवार्य पाठ्यपुस्तक है।
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