इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह स्वामी दयानंद सरस्वती के कार्यों को प्रस्तुत करने वाली ‘दयानंद-ग्रंथ-माला’ शृंखला का तीसरा भाग है। इस खंड में उनके किसी विशिष्ट ग्रंथ, जैसे ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का कोई अंश, उनके वेद भाष्यों का हिस्सा, या उनके द्वारा लिखे गए विभिन्न लेखों और पत्रों का संग्रह हो सकता है। यह शृंखला स्वामी दयानंद के विचारों को समग्र रूप में पाठकों तक पहुँचाने का एक प्रयास है, जिसमें उनका वैदिक दर्शन, सामाजिक सुधारों पर उनके विचार, और विभिन्न धार्मिक मतों की उनकी समालोचना शामिल है।
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