इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘धर्म-कथा-अनुयोग’ का पहला भाग है, जो जैन आगम साहित्य का एक महत्वपूर्ण विभाग है। ‘धर्मकथानुयोग’ में कहानियों, दृष्टांतों और रूपकों के माध्यम से धर्म के सिद्धांतों को समझाया जाता है। मुनि कन्हैयालाल जी द्वारा संपादित यह कृति इन रोचक और शिक्षाप्रद कथाओं का एक संग्रह प्रस्तुत करती है, जो आम लोगों को भी जैन धर्म के गूढ़ सिद्धांतों को सरलता से समझने में मदद करती हैं।
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