इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक धर्म की सेवा करने के व्यावहारिक तरीकों और उसकी सही प्रणाली पर एक मार्गदर्शिका है। इसमें यह समझाया गया है कि सच्ची धर्म-सेवा केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ मानव-सेवा, जीव-दया, और नैतिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना है। लेखक ने संगठित और व्यवस्थित तरीके से धार्मिक और सामाजिक कार्यों को करने की एक रूपरेखा प्रस्तुत की हो सकती है, ताकि धर्म का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँच सके।
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