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गङ्गलहरी पधात्मक टीका सहित - Ganglahari Paddhatamk Tika Sahit - Book
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गङ्गलहरी पधात्मक टीका सहित – Ganglahari Paddhatamk Tika Sahit – Book

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पुस्तक सार

यह कृति पंडितराज जगन्नाथ द्वारा रचित प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र “गंगालहरी” का एक संस्करण है, जिसमें पद्यात्मक (काव्यात्मक) हिंदी टीका भी शामिल है। “गंगालहरी” में कवि ने माँ गंगा की महिमा, उनकी पवित्रता और उनकी कृपा का अत्यंत काव्यात्मक और भक्तिपूर्ण वर्णन किया है। यह स्तोत्र अपनी साहित्यिक उत्कृष्टता और गहन भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है। इस संस्करण में, मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ एक पद्यात्मक हिंदी अनुवाद या टीका दी गई है, जो मूल के काव्य-सौंदर्य और भाव को बनाए रखते हुए उसे हिंदी भाषी पाठकों के लिए सुगम बनाती है। यह काव्य और भक्ति का एक अद्भुत संगम है, जो पाठकों को आनंदित करता है।

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