इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
हंस-नाद’ का अर्थ है ‘हंस की ध्वनि’। हंस को भारतीय परंपरा में विवेक और आत्म-ज्ञान का प्रतीक माना जाता है, जो नीर-क्षीर विवेक (दूध और पानी को अलग करने की क्षमता) रखता है। यह एक दार्शनिक या आध्यात्मिक कृति है, जिसका शीर्षक यह संकेत देता है कि इसमें विवेकपूर्ण और सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए गए हैं। यह पाठकों को असत्य से सत्य को अलग करने और आत्म-ज्ञान के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
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