इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ७वीं सदी के जैन आचार्य जिनसेन द्वारा रचित प्रसिद्ध ‘हरिवंश पुराण’ का दूसरा भाग है। यह एक जैन महाकाव्य है जिसमें यदु वंश या हरि वंश का विस्तृत इतिहास वर्णित है, विशेष रूप से भगवान कृष्ण, नेमिनाथ (22वें तीर्थंकर) और महाभारत के पात्रों का जैन दृष्टिकोण से चरित्र-चित्रण किया गया है। यह कृति न केवल एक धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि उस समय की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्थिति को समझने के लिए भी एक महत्वपूर्ण साहित्यिक स्रोत है।
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