इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
हरिवायुस्तुतिः’ मध्व संप्रदाय का एक महत्वपूर्ण और अत्यंत श्रद्धेय स्तोत्र है, जिसकी रचना श्री त्रिविक्रम पंडिताचार्य द्वारा की गई है। यह स्तोत्र मुख्य रूप से वायु देवता के तीसरे अवतार, श्री मध्वाचार्य की स्तुति में समर्पित है, जिन्हें भगवान हरि (विष्णु) का संदेशवाहक माना जाता है। इसमें मध्वाचार्य के गुणों, उनके दार्शनिक योगदान और भक्ति मार्ग में उनके महत्व का काव्यात्मक वर्णन है। यह द्वैत दर्शन के अनुयायियों के लिए केवल एक भक्ति पाठ ही नहीं, बल्कि उनके गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम भी है। इसकी भाषा गहरी भक्ति और दार्शनिक सार से परिपूर्ण है।
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