इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक हिंदी साहित्य के स्वर्ण युग, ‘भक्तिकाल’, की काव्य-साधना पर एक गहन अध्ययन है। इसमें कबीर, सूर, तुलसी, और जायसी जैसे महान कवियों की रचनाओं में निहित दार्शनिक और आध्यात्मिक साधना के विभिन्न रूपों (जैसे ज्ञान, भक्ति, प्रेम) का विश्लेषण किया गया है। यह कृति बताती है कि कैसे इन कवियों ने अपनी कविता को केवल कला के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर-प्राप्ति और समाज-सुधार के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया।
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