इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक हिंदी कविता में ‘प्रगतिवाद’ के साहित्यिक आंदोलन पर एक महत्वपूर्ण आलोचनात्मक अध्ययन है। इसमें 1936 के बाद उभरी उस काव्यधारा का विश्लेषण किया गया है जो मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित थी और जिसमें सामाजिक यथार्थ, वर्ग-संघर्ष, और शोषितों के प्रति सहानुभूति पर जोर दिया गया था। यह कृति नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल और त्रिलोचन जैसे प्रमुख प्रगतिवादी कवियों की रचनाओं और हिंदी साहित्य पर उनके प्रभाव का मूल्यांकन करती है।
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