इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक हिंदी भाषा में लिखी गई ‘रुबाइयों’ का एक संग्रह है। ‘रुबाई’ मूल रूप से एक फारसी काव्य-विधा है जिसमें चार पंक्तियाँ होती हैं, और इसकी पहली, दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक (क़ाफ़िया) मिलाया जाता है, जबकि तीसरी पंक्ति स्वतंत्र होती है। यह अपने संक्षिप्त आकार में एक संपूर्ण विचार या भाव को व्यक्त करने के लिए जानी जाती है। इस संग्रह में विभिन्न हिंदी कवियों द्वारा रचित रुबाइयाँ शामिल हो सकती हैं, जिनमें जीवन-दर्शन, प्रेम, वैराग्य और सामाजिक टिप्पणी जैसे विषय हो सकते हैं। यह पुस्तक पाठकों को हिंदी शायरी की इस खूबसूरत और सारगर्भित विधा से परिचित कराती है।
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