इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक हिंदी ‘उपन्यास’ के उद्भव, विकास और उसकी प्रमुख प्रवृत्तियों पर एक आलोचनात्मक अध्ययन है। इसमें प्रेमचंद-पूर्व युग से लेकर प्रेमचंद युग और स्वातंत्र्योत्तर काल तक के प्रमुख उपन्यासकारों और उनके महत्वपूर्ण उपन्यासों का विश्लेषण किया गया है। यह कृति उपन्यास के तत्वों, उसकी बदलती हुई विषय-वस्तु (सामाजिक, ऐतिहासिक, मनोवैज्ञानिक), और शिल्प-विधि पर विस्तार से प्रकाश डालती है। यह हिंदी साहित्य के छात्रों और अध्येताओं के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
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