इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह जैन धर्मशास्त्र पर एक विशिष्ट अध्ययन है जो ‘जैन धर्म में शासन-देवताओं’ (यक्ष और यक्षिणी) के स्थान और उनकी भूमिका का विश्लेषण करता है। यद्यपि जैन धर्म मूल रूप से आत्म-निर्भरता का मार्ग है, फिर भी इसमें तीर्थंकरों के सहायक के रूप में इन देवताओं की एक महत्वपूर्ण परंपरा है। यह पुस्तक उनकी उत्पत्ति, उनकी मूर्तिकला, और जैन उपासकों के जीवन में उनकी भक्ति के महत्व की पड़ताल करती है।
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